Sandhya ke bas do bol suhane (संध्या के बस दो बोल सुहाने लगते हैं)

Sandhya ke bas do bol suhane, संध्या के बस दो बोल सुहाने लगते हैं, माखनलाल चतुर्वेदी (Makhanlal Chaturvedi) द्वारा लिखित कविता है. सन्ध्या के बस दो बोल सुहाने लगते हैं सूरज की सौ-सौ बात नहीं भाती मुझको बोल-बोल में बोल उठी मन की चिड़िया नभ के ऊँचे पर उड़ जाना है भला-भला! पंखों की सर-सर … Read more

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