Jo mukhrit kar jati thi Kavita (जो मुखरित कर जाती थीं कविता)- महादेवी वर्मा
Jo mukhrit kar jati thi Kavita, जो मुखरित कर जाती थीं, महादेवी वर्मा (Mahadevi Verma) द्वारा लिखित कविता है. जो मुखरित कर जाती थीं मेरा नीरव आवाहन, मैं नें दुर्बल प्राणों की वह आज सुला दी कंपन! थिरकन अपनी पुतली की भारी पलकों में बाँधी निस्पंद पड़ी हैं आँखें बरसाने वाली आँधी! Jo mukhrit kar … Read more