Jagna apradh Kavita (जागना अपराध कविता)- माखनलाल चतुर्वेदी

Jagna apradh Kavita, जागना अपराध, माखनलाल चतुर्वेदी (Makhanlal Chaturvedi) द्वारा लिखित कविता है. जागना अपराध! इस विजन-वन गोद में सखि, मुक्ति-बंधन-मोद में सखि, विष-प्रहार-प्रमोद में सखि, मृदुल भावों स्नेह दावों अश्रु के अगणित अभावों का शिकारी – आ गया विध व्याध; जागना अपराध! Jagna apradh Kavita बंक वाली, भौंह काली, मौत, यह अमरत्व ढाली, करुण … Read more

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