Is tarah dhakkan lagaya (इस तरह ढक्कन लगाया रात ने)- माखनलाल चतुर्वेदी

Is tarah dhakkan lagaya, इस तरह ढक्कन लगाया रात ने, माखनलाल चतुर्वेदी (Makhanlal Chaturvedi) द्वारा लिखित कविता है. इस तरह ढक्कन लगाया रात ने इस तरफ़ या उस तरफ़ कोई न झाँके। बुझ गया सूर्य बुझ गया चाँद, तस्र् ओट लिये गगन भागता है तारों की मोट लिये! आगे-पीछे,ऊपर-नीचे अग-जग में तुम हुए अकेले छोड़ … Read more

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