Kyo in taro ko uljhate Kavita (क्यों इन तारों को उलझाते? कविता)- महादेवी वर्मा

Kyo in taro ko uljhate Kavita, क्यों इन तारों को उलझाते?, महादेवी वर्मा (Mahadevi Verma) द्वारा लिखित कविता है. क्यों इन तारों को उलझाते? अनजाने ही प्राणों में क्यों आ आ कर फिर जाते? पल में रागों को झंकृत कर, फिर विराग का अस्फुट स्वर भर, मेरी लघु जीवन वीणा पर क्या यह अस्फुट गाते? … Read more

Jo mukhrit kar jati thi Kavita (जो मुखरित कर जाती थीं कविता)- महादेवी वर्मा

Jo mukhrit kar jati thi Kavita, जो मुखरित कर जाती थीं, महादेवी वर्मा (Mahadevi Verma) द्वारा लिखित कविता है. जो मुखरित कर जाती थीं मेरा नीरव आवाहन, मैं नें दुर्बल प्राणों की वह आज सुला दी कंपन! थिरकन अपनी पुतली की भारी पलकों में बाँधी निस्पंद पड़ी हैं आँखें बरसाने वाली आँधी! Jo mukhrit kar … Read more

Main anant path Kavita (मैं अनंत पथ में लिखती जो कविता)- महादेवी वर्मा

Main anant path Kavita, मैं अनंत पथ में लिखती जो, महादेवी वर्मा (Mahadevi Verma) द्वारा लिखित कविता है. मै अनंत पथ में लिखती जो सस्मित सपनों की बाते उनको कभी न धो पायेंगी अपने आँसू से रातें! उड़् उड़ कर जो धूल करेगी मेघों का नभ में अभिषेक अमिट रहेगी उसके अंचल- में मेरी पीड़ा … Read more

Ab yeh chidiya kaha rahegi Kavita (अब यह चिड़िया कहाँ रहेगी)- महादेवी वर्मा

Ab yeh chidiya kaha rahegi Kavita, अब यह चिड़िया कहाँ रहेगी, महादेवी वर्मा (Mahadevi Verma) द्वारा लिखित प्रसिद्द बाल कविता है. आँधी आई जोर शोर से, डालें टूटी हैं झकोर से। उड़ा घोंसला अंडे फूटे, किससे दुख की बात कहेगी! अब यह चिड़िया कहाँ रहेगी? Ab yeh chidiya kaha rahegi Kavita हमने खोला आलमारी को, … Read more

Dhoop sa tan Kavita (धूप सा तन दीप सी मैं कविता)- महादेवी वर्मा

Dhoop sa tan Kavita, धूप सा तन दीप सी मैं, महादेवी वर्मा (Mahadevi Verma) द्वारा लिखित कविता है. धूप सा तन दीप सी मैं! उड़ रहा नित एक सौरभ-धूम-लेखा में बिखर तन, खो रहा निज को अथक आलोक-सांसों में पिघल मन अश्रु से गीला सृजन-पल, औ’ विसर्जन पुलक-उज्ज्वल, आ रही अविराम मिट मिट स्वजन ओर … Read more

Swapn se kisne jagaya Kavita (स्वप्न से किसने जगाया? कविता)- महादेवी वर्मा

Swapn se kisne jagaya Kavita, स्वप्न से किसने जगाया?, महादेवी वर्मा (Mahadevi Verma) द्वारा लिखित कविता है. स्वप्न से किसने जगाया? मैं सुरभि हूं। छोड़ कोमल फूल का घर, ढूंढती हूं निर्झर। पूछती हूं नभ धरा से- क्या नहीं ऋतुराज आया? Swapn se kisne jagaya Kavita मैं ऋतुओं में न्यारा वसंत, मैं अग-जग का प्यारा … Read more

Ashru yeh pani nahi hai Kavita (अश्रु यह पानी नहीं है कविता)- महादेवी वर्मा

Ashru yeh pani nahi hai Kavita, अश्रु यह पानी नहीं है, महादेवी वर्मा (Mahadevi Verma) द्वारा लिखित कविता है. अश्रु यह पानी नहीं है, यह व्यथा चंदन नहीं है! यह न समझो देव पूजा के सजीले उपकरण ये, यह न मानो अमरता से माँगने आए शरण ये, स्वाति को खोजा नहीं है और न सीपी … Read more

Priy chirantan hai Kavita (प्रिय चिरन्तन है कविता)- महादेवी वर्मा

Priy chirantan hai Kavita, प्रिय चिरन्तन है, महादेवी वर्मा (Mahadevi Verma) द्वारा लिखित कविता है. प्रिय चिरंतन है सजनि, क्षण-क्षण नवीन सुहासिनी मै! श्वास में मुझको छिपाकर वह असीम विशाल चिर घन शून्य में जब छा गया उसकी सजीली साध-सा बन, छिप कहाँ उसमें सकी बुझ-बुझ जली चल दामिनी मैं। छाँह को उसकी सजनि, नव … Read more

Main neer bhari Kavita (मैं नीर भरी दुख की बदली कविता)- महादेवी वर्मा

Main neer bhari Kavita, मैं नीर भरी दुख की बदली, महादेवी वर्मा (Mahadevi Verma) द्वारा लिखित कविता है. मैं नीर भरी दुख की बदली! स्पन्दन में चिर निस्पन्द बसा क्रन्दन में आहत विश्व हँसा नयनों में दीपक से जलते, पलकों में निर्झारिणी मचली! मेरा पग-पग संगीत भरा श्वासों से स्वप्न-पराग झरा नभ के नव रंग … Read more

Mera sajal mukh Kavita (मेरा सजल मुख देख लेते! कविता)- महादेवी वर्मा

Mera sajal mukh Kavita, मेरा सजल मुख देख लेते!, महादेवी वर्मा (Mahadevi Verma) द्वारा लिखित कविता है. मेरा सजल मुख देख लेते! यह करुण मुख देख लेता! सेतु शूलों का बना बाँधा विरह-वारीश का जल फूल की पलकें बनाकर प्यालियाँ बाँटा हलाहल! दुखमय सुख सुख भरा दुःख कौन लेता पूछ, जो तुम, ज्वाल-जल का देश … Read more

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